शून्य


मैं शून्य हूँ  - मैं शून्य हूँ - मैं शून्य हूँ - मैं शून्य हूँ   

शून्य की एक ही है पहचान – बनाता सबको वह अपना गुलाम;
निर्दयता ही है उसकी जान – पिलाता प्यार का है वो जाम
शून्य की यही है इक पहचान 
मैं शून्य हूँ 

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