पहचान पत्र
पहचान बना ले तू अपनी – जीवन को तू बरबाद न कर; यौवन तो है बस सौ दिन का – इसको तू बेकार न कर ... अब अगली पीढ़ी देख रही – उसको तू बेजार न कर; निकल तू पूरा सज-धज कर – दुनिया को तू निराश न कर; कृष्णीष्ट बनाया है तुझको – गुरु दरबार लगा समय बेकार न कर. आज का दिन सर्वोत्तम है – निष्छल दुनिया का बिगुल बजा; अगली पीढ़ी को निष्छल राह दिखे – ज्ञानवाच का निष्छल सूर्य दिखा; निष्छलकर्ण बना है पृथ्वी पालक – सूचना का प्रचार प्रसार तू कर.. तरस गई बेचारी दुनिया – उसका कुछ अब उद्धार तो कर ... कृष्णांश बना है कृष्णीष्ट फिर – कृष्ण बना कृष्णेंद्र तभी; निष्छल टेम्पल लगा हरिद्वार – दिल्ली में लगा कृष्णीष्ट गुरुदरबार; पहले था भारत विश्वगुरु – अब दिल्ली दरबार विश्वगुरु बन गया; दुनिया को बता आओ निष्छल हो जाओ इसी जन्म में कर लो पुनर्जन्म पुनर्जन्म पायेगा निष्छल दुनिया में भ्रममुक्त बुद्धि निष्छल मन निरोगी तन, मानव जीवन होगा सबका सफल निष्छल कुटुम्ब को मिलेगा जब बल कुच्छानाकर ...