जीवन पुकार

कबीर ज्ञान द्वारा तू स्वास्थ्य लाभ कर ले;
गुरु ग्रन्थ जी के द्वारा तू योनी मुक्ति कर ले ..
अपने विवाह को तू बन्धन-मुक्त कर ले;
योग से तू जीवन में आनन्द भर ले ....
जीवन जो बिताया – उसमे बहुत कमाया;
आया था खर्च करने – अब तो खर्च करले...
गिनती के बचे हैं सांस – इन्वैस्ट इनको कर ले;
रोग-मुक्त हो जो परिवार – स्वस्थ कर ले...
मानव-योनी पाई – इसका अर्थ समझ ले;
कृष्णांश है बैठा उसको – सुनले और समझले..
अपने 5 तत्वों को तू – संतुलन में ले आ;
आगे के जीवन को तो – अब तू मस्त कर ले..

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