निश्छालिज्म


निश्छालिज्म
(न्युमोकैल रूहानी योग)

श्री बनता है पांच तत्व से – रूह बंटी है पांच सत्व से;
रूह चलती है मन की राह – शरीर करता है बुद्धि की चाह | ..


बुद्धि जड़ है सब रोगों की – मन को कर रखा बदनाम;
मन तो है गट्ठर कर्मफलों का – नहीं कर सकता ख़ुद कोइ काम |


दिशा का करती है बुद्धि चुनाव – इन्द्रियों को फिर करती इस्तेमाल;
उलटे-सीधे काम कराती तन से – रख देती करके उसका बुरा हाल

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