शून्य
मैं हूँ शून्य – मैं हूँ शून्य;
मैं हूँ शून्य – मैं हूँ शून्य .....
शून्य की एक ही है पहचान – बनाता सबको वो अपना गुलाम;
निर्दयता ही है उसकी जान – पिलाता प्यार का है वो जाम
शून्य की यही है इक पहचान – मैं हूँ शून्य....
मैं हूँ शून्य – मैं हूँ शून्य; मैं हूँ शून्य – मैं हूँ शून्य;
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